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Sidhi news पूजा पार्क सीधी में बघेलखंड समेत विभिन्न प्रान्तों की कलाओं की हुई शानदार प्रस्तुति

Sidhi news सीधी जिले के स्थानीय पूजा पार्क में बीते दिवस उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज व संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित लोकोत्सव कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया । जिसमें विभिन्न प्रान्तों के लोक कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुत दी, बता दें कि बीते दिवस स्थानीय पूजा पार्क में लोक कला के संरक्षण और संवर्धन हेतु संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार ने सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पूरे भारत में सात सांस्कृतिक केन्द्रों की स्थापना की।सात केन्द्रों में से एक सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज को 7 प्रदेशों का मुख्यालय बनाया गया है इसी परिकल्पना के साथ राज्यों की शान्ति गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सातों प्रान्तों की कलाओं को मंच प्रदान कर विलुप्त लोक कलाओं से जनमानस को जोड़ने व सांस्कृतिक आदान प्रदान के उद्देश्य को देखते हुए विगत दिवस स्थानीय पूजा पार्क में लोक गायन व लोकनृत्य की प्रस्तुतियां हुईं।

कार्यक्रम के प्रारंभ में कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का आगाज किया जिनमें पूजा सिंह कुशराम,  जिला पंचायत सदस्य व सभापति स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग, निलेश शर्मा अनुविभागीय अधिकारी, पुष्पेंद्र मिश्रा नगर निरीक्षक, इंजीनियर आर बी सिंह टाटा शिक्षण संस्थान संचालक, डॉ मनोज सिंह सांसद प्रतिनिधि, अजीता द्विवेदी लोकगायिका उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन अंचित गौतम ने किया वहीं कार्यक्रम की शुरूआत बघेली गायन से की गई जिसमें बघेलखंड में विभिन्न शुभ अवसरों पर गाए जाने वाले लोकगीत बमभोलिया, बेलनहाई, दादरा , गैलहाई,फाग, सजनई और टप्पा की प्रस्तुती दी गई जिसे सृजन मिश्रा और उनके साथी श्रुति सिंह,शुभी सिंह,दिव्या द्विवेदी,मानसी तिवारी ,दृष्टि तिवारी,स्वर्णिम द्विवेदी,अनुभूति कुंदेर,अभिनय कुंदेर,देवांश तिवारी,ओमकार पाण्डेय ,श्लोक तिवारी,सत्यदीप द्विवेदी ने अद्भुत गायन से दर्शकों व श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।

वहीं बुंदेली गायन के लिए मिनी लता के सम्मान से सम्मानित ख्यातिलब्ध लोकगायिका सविता यादव ने अपने साथियों सहित प्रस्तुति दी । इसी क्रम में लोककलाओं के प्रस्तुतियों के क्रम में मथुरा से लोकगायन व नृत्य ब्रज वंदना व मयूर नृत्य फूलों की होली जैसे अनेक लोक कलाएं मुरारी लाल तिवारी व उनके साथियों द्वारा प्रस्तुत किए गए ।

उत्तराखंड से कैलाश ध्यानी ने झुमैलो लोकनृत्य की प्रस्तुति दी व सिक्किक की शर्मीला गदेली व उनके साथियों ने चर्चित लोकनृत्य तमांग सैलो की प्रस्तुति दी ।
वहीं करमा का ही एक स्वरूप घसिया करमा की प्रस्तुति लेकर रोशनी प्रसाद मिश्र व उनके साथी नन्हे घासी, श्यामलाल, मुन्ना घासी, रामदुलारे, कंसलाल, अमेरिका घासी,भोला घासी, लल्ली घासी 1, लल्ली घासी 2, बुधनी, किरनकली, श्यामकली,मानकुंवर, मुनिया घासी ने मनमोहक प्रस्तुति दी । और बुंदेलखंड  का बहुचर्चित लोकनृत्य राई ने खूब तालिया बटोरी ।

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